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  • Faithful to my Homeland, the Republic of Poland

     

  • सतत विकास और पोलिश ऊर्जा नीति

  • पोलैंड अपने 17 सतत विकास लक्ष्यों के साथ एजेंडा 2030 के अनुपालन में पूरी तरह से योगदान का इच्छुक है। इसे हाल ही में अक्टूबर, 2016 में दिल्ली में विश्व सतत विकास सम्मेलन के अवसर पर पर्यावरण विभाग के उप-मंत्री श्री स्लावोमीर माजुरेक के द्वारा दुहराया गया। हम, घरेलू तथा विदेशों, में प्राकृतिक पर्यवरण तथा जैव-विविधता की गुणवत्ता में सुधार के लिए लक्षित अनेक गतिविधियों में संलग्न हैं।

     

    प्रभावी पोलिश ऊर्जा नीति के अनुसार 2030 तक मुख्य लक्ष्य हैं: 

    • ऊर्जा दक्षता में सुधार;  

    • ईंधन तथा ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षा में वृद्धि;  

    • नाभिकीय ऊर्जा की शुरुआत के द्वारा विद्युत उत्पादन संरचना में वैविध्य;

    •; बायो-ईंधन सहित, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत का विकास तथा उपयोग;  

    • ईंधन तथा ऊर्जा बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी होना;  

    • ऊर्जा के उत्पादन का पर्यावरण पर दुष्प्रभाव कम करना।

     

    सभी प्रासंगिक हितधारकों की ऊपर उल्लेखित कार्यों में संलग्नता दीखनी महत्वपूर्ण है। इनमें से अनेक, अध्यवसायियों सहित, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सक्रिय खिलाड़ी हैं। उनमें से कुछ पहले ही भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है, यथा, अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं अपशिष्ट/पंक से ऊर्जा एकोलोग कर्नाटक, हरयाणा तथा महाराष्ट्र में कार्यरत, ऐरोन- क्षैतिज अथवा संकर विंड टर्बाइनों पर कार्य कर रही या सोलारिस जिसने जुलाई 2016 में शहरी परिवहन के लिए हाइब्रिड तथा वैद्युत बसों के निर्माण के लिए जेबीएम इंडिया के साथ के साथ संयुक्त उपक्रम हेतु हस्ताक्षर किया।      

     

    सोलारिस अर्बिनो –वर्ष 2017 की सिटी बस

     

    एकोलोग के अपशिष्ट जल अधिस्थापन

     

    पोलैंड का पर्यावरण मंत्रालय ग्रीनइवो प्रोजेक्ट का समर्थन करता है जो कि निम्नलिखित पर्यावरणीय कार्यों से संबंधित स्टार्ट-अपों का समूह है: 

    • जल तथा अपशिष्ट जल प्रबंधन
    • ऊर्जा बचत
    • वायु सुरक्षा
    • नवीकरणीय  
    • अपशिष्ट प्रबंधन
    • जैव-विविधता संरक्षण

       

      ग्रीनइवो कंपनियों का पूर्ण कैटेलॉग http://greenevo.gov.pl/en/zielone-technologie पर पाया जा सकता है।

    विशिष्ट प्रक्षेत्र:  

    ऊर्जा प्रायोजनों के लिए ठोस बायोमास

    पोलैंड बायोमास के भस्मीकरण या पुनः-भस्मीकरण के द्वारा अपनी नवीकरणीय ऊर्जा का 85% निर्मित करता है। जंगल तथा कृषि के बायोमास अपशिष्ट ऊर्जा प्रायोजनों के लिए उपयोग होते हैं।

    लकड़ी के लिए मैन्युअली लोडिंग बॉयलरों वाले घरों की संख्या लगभग 100,000 अनुमानित की जाती है, लेकिन उनकी शक्ति सिर्फ कुछ हजार वाट है। बायोमास को गर्म करने वाले सबसे बड़े संयंत्र स्जेजेसिनेक, बर्लिनेक, ब्रोडनाइस, हाज्नोव्का तथा पिस्ज के बगल में अवस्थित हैं। पिस्ज में सबसे बड़ा बायोमास बायलर कक्ष है- 4 पॉलिटेकनिक प्रकार के बायलर 87.4% दक्षता के साथ कुल 21 मेगावाट की शक्ति के लिए एकसाथ कार्य कर रहे हैं।  

     

     

    बायोईंधन तथा बायोगैस

    पोलैंड में गैसोलीन में बायोइथनॉल का व्यापक पैमाने पर उपयोग की शुरुआत 1993 अंत में हुई। पोलैंड में निर्जलीकरण इथेनॉल संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता 700 मिलियन dm3 है। वर्तमान में पोलैंड में सबसे बड़े बायोइथेनॉल संयंत्र स्टारोगार्ड, ओबोरनिकी तथा व्रोक्ला में अवस्थित हैं। बायोडीजल का सबसे बड़े उत्पादनकर्ता राफिनेरिया ट्रजेबिनिया,एसए, तथा सुरोचोकव, टिची तथा मालबोर्क में फैक्ट्रियाँ हैं।    

    वह शहर जिसने सिटी बसों के लिए बायोइथेनॉल का उपयोग ईंधन के लिए सबसे पहले किया, वह 2011 में स्लुपक था।    

    पोलैंड में बायोगैस तकनीक हाल के वर्षों में अच्छी विकसित हुई है- मार्च 2013 में पोलैंड में लगभग 112 मेगवाट की कुल विद्युत क्षमता के साथ 196 बायोगैस संयंत्र थे। पिछली सदी के मध्य नब्बे के दशक में बायोगैस संयंत्र अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों तथा लैंडफिलों के नजदीक स्थापित किए गए। 2008-2013 के बीच 30 कृषि बायोगैस संयंत्रों की स्थापना हुई।

     

    शहरी पुनरोद्धार

    पोलैंड शहरों के पुनरोद्धार- शहर भर में संकुलन का अग्रगामी विकास पर वैश्विक चुनौतियाँ तथा परिस्थितियाँ की थीम पर लोज शहर में अंतरराष्ट्रीय एक्स्पो 2022 के आयोजन हेतु आवेदन कर रहा है। यह स्मार्ट शहरों से संबंधी विषयों पर सहयोग के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म हो सकता है।

    पोलैंड तथा लोज का विचार एक्स्पो को सिटी सेंटर में लौटाना है। एक्स्पो 2022 लोज, पोल्स्का यूरोप, पोलैंड के केंद्र तथा शहर की हृदयस्थली में होगा।

     

    लोज पुनरोद्धार पर प्रस्तुति

    संदर्भ: पिचोटा जी, इग्लिंस्की बी, बक्चज्वोस्की आर (2014), पोलिश ऊर्जा क्षेत्र में हरित तकनीकें-सिंहावलोकन

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