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  • पोलैंड: खनन का इतिहास

  • पोलैंड: खनन का इतिहास

    पोलैंड में खनन के प्रारंभिक प्रमाण 3500 ई.पू. (ईसा पूर्व) होने का पता चलता है जब नवपाषाण औजार निर्माताओं द्वारा फ्लिंट पत्थर का खनन किया गया था। क्‍रजेमियोनकी ओपेटोस्की में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फ्लिंट परिरक्षित खदानों में से एक है (3500-1200 ई.पू.)।  यह यूरोप के सबसे अधिक मूल्यवान पुरातात्विक स्थलों में से एक भी है।

    चौथी सदी ई.पू. में लौह अयस्क का सिलेसिया की उपरीभूमि और स्वेतोक्रज़यस्की के पहाड़ों में खनन शुरू कर दिया गया था।  उसी समय निर्माण और चीनी मिट्टी सामग्रियाँ (पत्थर, मिट्टी आदि) देश के विभिन्न भागों में प्रकट होने लगी जिस प्रकार सिलेसिया और मालोपेलस्का में शीशे, तांबे, चांदी और सोने की खानें दिखाई देने लगी थी।

    6000 वर्ष पहले कोयले की खान

     

    मध्य काल में बोचनिया और क्रेकॉ के निकट वियलिक्ज़का में खनिज नमक का खनन एक महत्वपूर्ण उद्योग था।  वह खानें शाही संपत्ति थी और पियास्ट व जैगियलोन राजवंशों के तहत राज्य की आय का एक-तिहाई हिस्सा प्रदान करती थी।  नमक के पैसों को शाही अदालत, व्यापार मार्गों की रक्षा करने वाले रक्षागारों, सेना और 1364 में महान राजा केसिमिट द्वारा स्थापित क्रेकॉ अकादमी (वर्तमान में जैगियलोनियन विश्विद्यालय) की रखरखाव के लिए खर्च किया जाता था।

     

     

    पोलैंड में आधुनिक खनन

     

     

    पोलैंड के कोयला खनन उद्योग में वर्तमान में लगभग 1 लाख कर्मचारी हैं।  वे केवल खनिक नही हैं। कोपेक्स, फामूर, ग्लिनिक और अन्य पोलिश कंपनियाँ कोयले के उन्मूलन, समृद्ध करने और गैसीकरण के लिए आधुनिक उपकरणों का उत्पादन करती हैं।  फामूर की कोलकाता में एक सहायक कंपनी है और कोपेक्स भारत में खनन आधुनिकीकरण में सक्रिय है।  वे क्रेकॉ में विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय, केन्द्रीय खनन संस्थान, कोयले का रसायनिक प्रसंस्करण संस्थान और अन्य विश्वविद्यालयों व वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करते हैं।  पोलिश उपकरण के निर्यात का वित्तपोषण या पोलिश प्रोद्योगिकीयों और तकनीकी जानकारियों की भारत में प्रस्तावना राज्य अधीन बैंक गोसपोडरस्तवा क्राजोवेगो द्वारा क्रियान्वित की जा सकती है।

     

    पोलैंड से कई आधुनिक कोयला खनन उपकरण निम्नलिखित दिए गए हैं –

    लांगवॉल प्रणालियाँ

    लांगवॉल घसियारों

    यंत्रचालित छत आधार

     

    वाहक प्रणालियाँ, ई-कोयला खनन

     

    पोलैंड में कोयला खनन का भविष्य

    ''2030 तक पोलैंड की ऊर्जा नीति'' के अनुसार कोयला विद्युत उत्पादन के लिए मुख्य ईंधन बने रहना अपेक्षित है लेकिन उद्योग द्वारा ऊर्जा की खपत की एक सामान्य कमी और 2020 तक नवीकरणीय ऊर्जा के 19 प्रतिशत हिस्से का लक्ष्य रखा गया है।  फिर भी, 2030 में बिजली की खपत 30 प्रतिशत, गैस की खपत में 42 प्रतिशत और पेट्रोलियम उत्पादों में 7 प्रतिशत वृद्धि की अपेक्षा है। प्रधानमंत्री बियेता सिज़डलो ने 22 फरवरी, 2016 को घोषणा की कि कोयला पोलैंड की ऊर्जा मिश्रण का एक स्तंभ बना रहेगा।

     

     

    वारसॉ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसार पोलैंड का 2009 और 2030 में ऊर्जा मिश्रण

     

    पोलिश कोयले के जमा विकसित वसूली भंडार 60 और उससे अधिक वर्षों के लिए पर्याप्त हैं।  नीचे दिया गया मानचित्र हमें पोलैंड में कोयला खनन की उज्जवल संभावनाओं के प्रति विश्वास दिलाता है।

     

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