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  • वर्तमान समाचार

  • 28 May 2018

    विटोल्ड पिलेकी की हत्या सत्तर वर्ष पहले वारसॉ में राकोविका स्ट्रीट जेल में हुई थी। वे एक पोलिश अधिकारी, नाजी जर्मन एकाग्रता शिविर औशविट्ज़ के पोलिश अंडरग्राउंड स्टेट के सदस्य होने के साथ-साथ तथाकथित पिलेकी रिपोर्ट्स के लेखक भी थे।

    विटोल्ड पिलेकी ने गृह सेना में सेवा की और वारसॉ विद्रोह में हिस्सा लिया। 1947 में उन्हें सोवियत अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार और यातना देने के बाद 1947 में   उन पर मुकदमा चला और उन्हें निष्पादित किया गया। पोलैंड की आजादी के बाद, उन्हें 1990 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार  पुनर्वासित कर कर्नल के पद  के साथ ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल से सम्मानित किया। ब्रिटिश इतिहासकार प्रो.  डॉ. माइकल फुट ने द्वितीय विश्व युद्ध के प्रतिरोध आंदोलन में छः सबसे बड़े लोगों में से एक के रूप में पिलेकी का नाम दिया।

    विटोल्ड पिलेकी  ने पोलिश अंडरग्राउंड स्टेट ऑशविट्ज़-बर्कनऊ (Auschwitz-Birkenau) के अधिकारियों  के सामने जर्मन नाज़ी एकाग्रता और उन्मूलन शिविर ऑशविट्ज़-बर्कनऊ (Auschwitz-Birkenau) में घुसने का विचार  प्रस्तुत किया | पिलेकी का काम शिविर की स्थितियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना था और उन्हें बाहरी दुनिया में भेजना था। शिविर में उन्होंने सैन्य संगठन संघ भी स्थापित किया, जो कि विद्रोह और शिविर की मुक्ति के लिए तैयार था। ऑशविट्ज़ (Auschwitz) से बच निकलने  के बाद, उन्होंने नाजी जर्मनी के अपराधों को दस्तावेज करती हुए रिपोर्टें बनाईं जिन्हें उन्होंने शिविर में देखा था। मित्र राष्ट्रों को रिपोर्ट  भेजी गयी और  यान कौश्कीश (Jan Karski) की गतिविधियों के साथ, नर संहार पर दुनिया का पहला स्रोत गठित किया गया।

    कैप्टन पिलेकी  ने 1945 की  एक रिपोर्ट में, ऑशविट्ज़-बर्कनऊ एकाग्रता शिविर में अपने बिताये गए समय का वर्णन करते हुए कहा कि "आज मानवता क्या कह सकती है, यह मानवता जो संस्कृति की प्रगति को साबित करना चाहती है, और 20 वीं शताब्दी को पिछले सदियों की तुलना में बहुत अच्छे स्तर पर स्थापित करती है। क्या हम बीसवीं शताब्दी के लोग, उन लोगों के चेहरों को देख सकते हैं जो एक बार रहते थे और - आश्चर्यजनक रूप से - हम अपनी श्रेष्ठता साबित करते हैं, जबकि हमारे समय में सशस्त्र  सेना  नवीनतम तकनीकी  उपलब्धियों के माध्यम से केवल शत्रु सेना को नष्ट नहीं करता है, बल्कि पूरे राष्ट्र  व  निरीह समाज का संहार करते हैं|”

     

    पोलैंड के प्रमुख राबाई माइकल शुडरॉक (Michael Schudrich) ने निम्नलिखित शब्दों में विटोल्ड पिलेकी   के साहसिक कर्मों का वर्णन किया: "यह अकल्पनीय बुराई के समय में अकल्पनीय अच्छाई का एक उदाहरण है। नरसंहार के दौरान पोल्स ने अपनी जान खतरे में डाल कर किस प्रकार यहूदियों की मदद की इसके अनेकों  सबूत मिलते हैं। हमें, आज जहां भी बुराई हो रही है उस हर जगह पिलेकी जैसे लोगों के उदाहरण का पालन करना होगा| "

     

    विदेश मंत्रालय, प्रेस कार्यालय

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