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  • वर्तमान समाचार

  • 6 September 2018

    उन्नासी साल पहले, जर्मनी ने पोलैंड पर हमला करने के साथ द्वितीय विश्व की शुरुआत की। 1 सितंबर 1939 के शुरुआती घंटों में, जर्मन रीच के सैनिकों ने पोलिश-जर्मन सीमा पार कर ली। भले ही 1939 रक्षात्मक युद्ध में आक्रमणकारियों की सेना की काफी अधिक संख्या के कारण पोलिश सशस्त्र बलों की हार हुई थी , लेकिन इसी हार के साथ द्वितीय विश्व युद्ध के अलग - अलग मोर्चों पर पोलिश सेना के जुड़ने की शुरुआत हुई |

     

    1 सितंबर को 4:45 बजे, जर्मन सेना ने 1,600 किलोमीटर लंबी फ्रंटलाइन के साथ पोलैंड पर अपना हमला शुरू किया। युद्ध के पहले दिन,पोलिश सैनिकों ने  वेस्टरप्लेट पर उनका कड़ा मुकाबला किया और जमकर उनका प्रतिरोध करते हुए उसे एक सप्ताह तक बचाया। जर्मन कमांडरों की योजनाओं के अनुसार, 'बिजली युद्ध' या ब्लिट्जक्रीग की रणनीति को पोलिश रक्षात्मक सशस्त्र बलों को, चारों ओर से घेरने और उन्हें कुचलने के लिए जल्दी से जल्दी रखा जाना था। दुश्मन के इस चकमे से पोलिश सेना को अभियान के शुरुआती दिनों के दौरान  अपने कदम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। फिर भी,जर्मन  ‘फाल वीज़’( Fall Weiss) योजना अभी भी पूरी तरह से नहीं अपनाई गई थी।

    3 सितंबर 1939 को फ्रांस और ब्रिटेन द्वारा जर्मन रीच पर युद्ध की घोषणा ने पोलैंड को सहयोगी राहत की आशा जताई। सभी प्रमुख पोलिश शहरों में उत्साही रैलियों का आयोजन किया गया। लेकिन दोनों देशों के सैन्य और नागरिक अधिकारियों ने जर्मनी के खिलाफ कोई निर्णायक सैन्य अभियान शुरू नहीं किया और इस प्रकार उनकी सहयोगी प्रतिबद्धताओं को तोड़ दिया। 1940 के वसंत में जर्मन फ्रांस के आक्रमण तक यह तथाकथित फोनी युद्ध (phoney war) समाप्त हो गया।

    जर्मनी ने न केवल पोलैंड पर हमला किया क्योंकि वह उस पर  अपने आधिपत्य का दावा करना चाहता था, बल्कि उसकी आबादी को कम कर  उसके बौद्धिक अभिजात वर्ग को पूरी तरह  खत्म करना चाहता था | युद्ध के आरम्भिक समय में आयोजित वेलून (Wielun)और अन्य पोलिश कस्बों पर वायु हमले के दौरान कई नागरिकों की मौत हो गई। जर्मनी ने 12 सितंबर 1939 को जलोआ( Jellowa) में एक सम्मेलन में पोलैंड के बौद्धिक अभिजात वर्ग को खत्म करने की अपनी योजना पर चर्चा की। इसमें यह तय हुआ की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, जर्मन रीच इंटेलिजेंस ज़क्शन और एबी (Intelligenzaktion and AB ) अभियानों के हिस्से के रूप में पोलिश बुद्धिजीवियों की हत्या की अपनी योजना को लगातार लागू रखा जाएगा ।

     

     

    17 सितंबर 1939 को पोलैंड पर दुश्मन और सोवियत हमले की काफी सैन्य श्रेष्ठता के बावजूद पोलिश सेना ने दुश्मन के खिलाफ भयंकर प्रतिरोध जारी रखा। कॉक की लड़ाई (battle of Kock)सितंबर 1939 अभियान का आखिरी प्रकरण था। पोलिश सैनिकों ने 6 अक्टूबर 1939 को अपने शस्त्रों समर्पण कर दिये, लेकिन कुछ इकाइयां जैसे पोलिश सेना के मेजर हबल के पृथक इकाई अभी भी जर्मन हमलावर के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल थीं ।

    नाजी आक्रमणकारियों ने अपने कब्जे में आये  पोलिश क्षेत्रों में रहने वाली आबादी का बड़े पैमाने पर उन्मूलन शुरू कर दिया, और 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के आखिरी दिन तक सामूहिक हत्याओं को जारी रखा। नाजी आक्रमणकारियों ने बड़े पैमाने पर यहूदी आबादी के उन्मूलन, और सामूहिक आतंक और दमन का एक कार्यक्रम किया और किसी भी प्रकार के प्रतिरोध के संकेत की प्रतिक्रिया में, कई लाख पोलिश नागरिकों की हत्या कर डाली |

    पोलैंड ने 1939 के रक्षात्मक युद्ध हारने के बाद भी अपने क्षेत्रों पर  कब्ज़ा करने वाले लोगों  के खिलाफ प्रतिरोध जारी रखा। 27 सितंबर 1939 को,  दोनों अधिकारियों द्वारा दमन के बावजूद, पोलैंड की जीत के लिए सेवा योजना बनाई गई थी। कब्जे वाले यूरोप में सबसे बड़े गुप्त राज्य में ‘पोलिश प्रतिरोध आंदोलन’ की भूमिगत संरचनाएं विकसित हुईं, और पोलैंड के लोगों ने अन्य द्वितीय विश्व युद्ध मोर्चों पर युद्ध का अंत किया, अंततः ‘मित्र राष्ट्र’ की जीत और द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में योगदान दिया।

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