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  • वर्तमान समाचार

  • 1 February 2018

    जर्मन नाज़ी सामूहिक कैद शिविर ऑशविट्ज़- बर्कनाओ सामूहिक संहार का सबसे जाना पहचाना प्रतीक है और विश्व में नरसंहार का सबसे प्रसिद्ध स्थल है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 जनवरी को 2005 में शिविर की मुक्ति की ६०वीं वर्षगांठ पर इस दिन को होलोकॉस्ट के पीड़ितों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्मरण दिवस के रूप में स्थापित किया था।

    ऑशविट्ज़ शिविर सबसे बड़ा जर्मन सामूहिक कैद और संहार शिविर था। यह कब्ज़ा करने वाली सेना जर्मन सेना द्वारा बड़े पैमाने पर पोल्स लोगों की सामूहिक गिरफ्तारी और जर्मन-कब्जे वाले पोलैंड की मौजूदा जेलों में कैदियों की अत्यधिक संख्या के परिणामस्वरूप बनाया गया था।

     

    दो साल बाद, यह शिविर एन्डलोसेन  डे युडेनफ्राग (Endlösung der Judenfrage) अर्थात यहूदी प्रश्न का 'अंतिम समाधान'  के कार्यान्वयन के लिए इस्तेमाल किए गए केंद्रों में से एक बन गया - जो उन यहूदियों का खून करने की नाज़ी योजना थी जो उस इलाके में रहते थे जिन पर नाज़ी जर्मनी का कब्ज़ा था |

     

    केवल ऑशविट्ज़- बर्कनाओ सामूहिक कैद शिविर में ही, जर्मन अपराधियों ने 10 से 15 लाख लोगों की हत्या कर दी, जिनमें लगभग दस लाख यहूदी थे, जिनमें से कई पोलैंड गणराज्य के नागरिक थे।

     

    जर्मन आतंकी तंत्र ने न केवल ऑशविट्ज़ में, बल्कि जर्मनी , संबद्ध अक्षरेखा राज्यों और उनके द्वारा कब्जे वाले इलाकों के अन्य सैकड़ों सामूहिक कैद शिविरों, बस्तियों में और साथ ही कई यूरोपीय गांवों की सड़कों पर फांसी के दौरान भी संहार किए गए |यह अनुमान लगाया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 60 लाख यहूदियों की मृत्यु हो गई थी|

     

    हजारों कब्रिस्तान, स्मारक और स्मृति के अन्य स्थान बड़े पैमाने पर जनसंहार की स्मृति में श्रद्धांजलि देते हैं। युद्ध के दौरान, विशेषकर ऑशविट्ज़- बर्कनाओ कुख्यात था। यद्यपि संहार के कई पीड़ितों के पास उनकी अपनी कब्र भी नहीं हैं , फिर भी उनकी स्मृति जनता , संस्थाओं और संहार के पीड़ितों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्मरण दिवस के कार्यक्रमों के माध्यम से  जीवित रखी जाती है|

     

    द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान निर्वासित पोलिश सरकार और हजारों पोल्स, जो एक जैसी मानवीय एकता की भावना से प्रेरित थे, यहूदियों की मदद करने में शामिल थे जबकि वे जानते थे कि कब्ज़ा किये गए पोलैंड में ऐसा करने की सजा मृत्युदंड थी। निर्वासित पोलिश सरकार के तत्वावधान में संचालित, यहूदियों की सहायता के लिए बनी परिषद ज़ेगोटा (Żegota) कब्जा किये गए यूरोप में एकमात्र राज्य संगठन था जो विशेष रूप से यहूदियों को बचाने के लिए स्थापित किया गया था। पोल्स लोगों की भी एक बड़ी संख्या है जिन्हें ‘याड वेशेम के ‘होलोकॉस्ट मार्टियरस और हीरोज़ रिमेम्बरेंस अथॉरिटी’ द्वारा न्याय परायण की उपाधि प्रदान की जायेगी |

     

    राष्ट्र के कई न्याय परायण लोगों में इरेना सेंडलेर (Irena Sendler) भी एक थीं| वारसॉ के समाज कल्याण विभाग में काम करते समय, 1939-42 में, सेंडलेर और उसके सहयोगियों ने वॉर्सो बस्ती से 2,500 यहूदी बच्चों को बचाया। पोलैंड गणराज्य की संसद ने वर्ष 2018 को इरेना सेंडलेर वर्ष के रूप में स्थापित किया ।

     

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